Monday, September 12, 2016

हिन्दी

प्रगति वही देश है करता
जिसकी अपनी भाषा हो
दूजे की भाषा अपनाकर
क्या स्वाभिमान की आशा हो

हिन्दी के बढ़ते क़दमों से
आज ब्रह्माण्ड स्तब्ध है
अंग्रेज़ी जर्मन व चीनी
सबकी नजर हिन्दी पर है

आओ इसके प्रगति रथ को
हम मज़बूत बनाते हैं
हिन्दी बोल व लिखकर के
विजय यात्रा बढ़ाते हैं
( कापी राईट सुरक्षित )
    वंदना सिंह

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