"क़ाबिल "-ऋतिक रोशन व यामी गौतम की वो फ़िल्म है जिसने इन दोनों के फ़िल्मी ग्राफ़ को ऊपर उठाया है, सबसे अधिक तारीफ़ के पात्र इसके डायरेक्टर संजय गुप्ता हैं ।ऋतिक एंग्री यंग मैन रूप में ज़बरदस्त लगे हैं । इस फ़िल्म में नायक व नायिका दोनों ही अंधे हैं इसके बावजूद वो कितनी सहजता से जीवन यापन कर रहे हैं वह देखने वाला है । शुरू में पता ही नहीं चलता कि वो अंधे हैं ,यही डायरेक्टर का कमाल है । फ़िल्म में ऋतिक ने हीरो वाले सभी काम किये ।उनकी पत्नी के साथ जो अन्याय हुआ,उसका विरोध करना,अन्याय के विरूद्ध लड़ना बिल्कुल रियल लगा कुछ भी बनावटी नही महसूस हुआ । संगीत की दृष्टि से भी फ़िल्म ठीक ठाक है । कहानी अच्छी है,अभिनय तो लाजवाब है, कुल मिला कर फ़िल्म अच्छी है ।
nanneh pankh
Wednesday, February 1, 2017
ऐसा हो बसंत
अद्भुत शक्ति का पदार्पण हो
प्रेम उमंगों के हों रंग
नये उत्साह भरे जीवन में
अग्यानता का हो अंत
ऐसा हो ये बसंत
-वंदना सिंह
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ
प्रेम उमंगों के हों रंग
नये उत्साह भरे जीवन में
अग्यानता का हो अंत
ऐसा हो ये बसंत
-वंदना सिंह
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ
Sunday, January 8, 2017
चिड़िया
अक्सर मैं लान में
चिड़ियों को चहकते
देखती हूँ
कभी वो फुदकती हैं
कभी क्यारी के
पानी में नहाती हैं
और फिर फड़फड़ा कर
पंखों से
पानी को निचोड़ती हैं
चीं चीं की आवाज़
करके अपनी
ख़ुशी ,डर व नाराज़गी
को ज़ाहिर करती हैं
कुछ क्षणों तक ही
ये सब चलता है
और पुन: वो
बसेरे की तरफ़ उड़
जाती हैं !
वंदना सिंह
(कापी राईट सुरक्षित)
चिड़ियों को चहकते
देखती हूँ
कभी वो फुदकती हैं
कभी क्यारी के
पानी में नहाती हैं
और फिर फड़फड़ा कर
पंखों से
पानी को निचोड़ती हैं
चीं चीं की आवाज़
करके अपनी
ख़ुशी ,डर व नाराज़गी
को ज़ाहिर करती हैं
कुछ क्षणों तक ही
ये सब चलता है
और पुन: वो
बसेरे की तरफ़ उड़
जाती हैं !
वंदना सिंह
(कापी राईट सुरक्षित)
Thursday, September 22, 2016
Wednesday, September 14, 2016
देवनागरी
सूरज की प्रथम किरन सी
मंदिर के घंटों की धुन सी
वेला की ख़ुशबू जैसी
तन मन में तू उतर रही
हे देवनागरी !
सोंधी सोंधी माटी सी
व्यार में तू घुल रही
चंदन की ठंडक जैसी
मन मंदिर में उतर रही
हे देवनागरी !
कण कण में तेरी थाती
सबसे सुंदर तेरी बाती
सितार की झंकार जैसी
रोम रोम में उतर रही
हे देवनागरी !
वर्ण वर्ण सी जब तू बढ़ती
नई ईबारत नित तू लिखती
अविष्कार की जननी जैसी
विश्व पटल पर उतर रही
हे देवनागरी !
(कापी राईट सुरक्षित)
वंदना सिंह
१२/९/१६
मंदिर के घंटों की धुन सी
वेला की ख़ुशबू जैसी
तन मन में तू उतर रही
हे देवनागरी !
सोंधी सोंधी माटी सी
व्यार में तू घुल रही
चंदन की ठंडक जैसी
मन मंदिर में उतर रही
हे देवनागरी !
कण कण में तेरी थाती
सबसे सुंदर तेरी बाती
सितार की झंकार जैसी
रोम रोम में उतर रही
हे देवनागरी !
वर्ण वर्ण सी जब तू बढ़ती
नई ईबारत नित तू लिखती
अविष्कार की जननी जैसी
विश्व पटल पर उतर रही
हे देवनागरी !
(कापी राईट सुरक्षित)
वंदना सिंह
१२/९/१६
Monday, September 12, 2016
हिन्दी
प्रगति वही देश है करता
जिसकी अपनी भाषा हो
दूजे की भाषा अपनाकर
क्या स्वाभिमान की आशा हो
हिन्दी के बढ़ते क़दमों से
आज ब्रह्माण्ड स्तब्ध है
अंग्रेज़ी जर्मन व चीनी
सबकी नजर हिन्दी पर है
आओ इसके प्रगति रथ को
हम मज़बूत बनाते हैं
हिन्दी बोल व लिखकर के
विजय यात्रा बढ़ाते हैं
( कापी राईट सुरक्षित )
वंदना सिंह
जिसकी अपनी भाषा हो
दूजे की भाषा अपनाकर
क्या स्वाभिमान की आशा हो
हिन्दी के बढ़ते क़दमों से
आज ब्रह्माण्ड स्तब्ध है
अंग्रेज़ी जर्मन व चीनी
सबकी नजर हिन्दी पर है
आओ इसके प्रगति रथ को
हम मज़बूत बनाते हैं
हिन्दी बोल व लिखकर के
विजय यात्रा बढ़ाते हैं
( कापी राईट सुरक्षित )
वंदना सिंह
Saturday, September 10, 2016
गर मारा न होता
रोका था कभी तुममें मुझे इस भूलोक पर आनें से
आ भी गई ज़बरन तो लगे पीछा छुड़ाने तुम
हिम्मत दिखा कर गर तुमनें आगे बढ़ाया होता
तो शायद आज जग में तुम्हारा नाम भी होता
( कापी राईट सुरक्षित)
वंदना सिंह
आ भी गई ज़बरन तो लगे पीछा छुड़ाने तुम
हिम्मत दिखा कर गर तुमनें आगे बढ़ाया होता
तो शायद आज जग में तुम्हारा नाम भी होता
( कापी राईट सुरक्षित)
वंदना सिंह
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