अक्सर मैं लान में
चिड़ियों को चहकते
देखती हूँ
कभी वो फुदकती हैं
कभी क्यारी के
पानी में नहाती हैं
और फिर फड़फड़ा कर
पंखों से
पानी को निचोड़ती हैं
चीं चीं की आवाज़
करके अपनी
ख़ुशी ,डर व नाराज़गी
को ज़ाहिर करती हैं
कुछ क्षणों तक ही
ये सब चलता है
और पुन: वो
बसेरे की तरफ़ उड़
जाती हैं !
वंदना सिंह
(कापी राईट सुरक्षित)
चिड़ियों को चहकते
देखती हूँ
कभी वो फुदकती हैं
कभी क्यारी के
पानी में नहाती हैं
और फिर फड़फड़ा कर
पंखों से
पानी को निचोड़ती हैं
चीं चीं की आवाज़
करके अपनी
ख़ुशी ,डर व नाराज़गी
को ज़ाहिर करती हैं
कुछ क्षणों तक ही
ये सब चलता है
और पुन: वो
बसेरे की तरफ़ उड़
जाती हैं !
वंदना सिंह
(कापी राईट सुरक्षित)
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