Monday, April 18, 2016

लड़की

लड़की होना क्या गुनाह है ?
पर लगता है कि ये सच है
उसके जन्म पर अक्सर
मातम मनाया जाता है
पहननें को भाई के कपडे
खानें को जूठा दिया जाता है
पर किस्मत देखो वो
मरती नहीं,जिन्दा रहती है
और धीरे धीरे जब वो
बड़ी हो जाती है,संयोग
से थोड़ा बहुत पढ़ भी
जाती है,अब तो जिंदगी
और भी नरक है,
उसके ब्याह की
उमर हो गई है,पर
कहीं बात न बननें पर
तानों से गल गई है
शरीर सूख पर कांटा
हो गया है,ऊपर से
घर के काम नें दीमक
का काम किया है
आज वो तीस को
पार कर गई है
पर लगता है जैसे वो
चालीस की हो गई है
भाई ने जब कह दिया
शादी की उमर नही रही
उसी पल उसने जीने की
आस छोड़ दी
रोज रोज की चिकचिक
से तंग आ गई वो
खानें के साथ सल्फाज
खा गई वो
चिठ्ठी में सबाल पूछा है
लड़की होना क्या गुनाह है ?

          वंदना सिंह।             
(कापी राईट सुरक्षित )

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