Wednesday, April 20, 2016

डाइनामाइट

संसद में जूते चलते या जब होती हाथापाई
हाय री किस्मत तूनें ये कैसी तस्वीर दिखाई
ये देश है वीर भगत का,आजाद और गाँधी का
उन रस्मों का,कस्मों का,और है उनके सपनों का
जिसनें सब कुछ बार दिया,तब आजादी पाई
हाय री किस्मत--------
याद करो उस हमले को जब संसद थर्राई
सारे सांसद भाग गये,तब संतोष सामनें आई
एेसे बुजदिल नेताओं की नारी नें जान बचाई
हाय री किस्मत ---------
जेलें भरी पड़ीं हैं आतंकी हमलावारों से
कोई रियायत नहीं करो,तुम एेसे गद्दारों से
एक डाइनामाइट से कर दो उनकी विदाई
हाय री किस्मत-----------
संसद में जूते चलते या जब होती हाथापाई
हाय री किस्मत तूने ,ये कैसी तस्वीर दिखाई।

वंदना सिंह
(कापी राईट सुरक्षित)

Tuesday, April 19, 2016

सपना

सुखी जीवन की कल्पना हर इंसान करता है
मैंनें भी की इसमें कुछ नया नहीं है
पर कल्पना के पंख पर बैठ कर
मैं जब उड़ रही थी,सपनें बुन रही थी
सपनों की पतंग ऊँची थी,डोर कच्ची थी
पता न चला कब टूट गई,मैं उठ कर बैठ गई ।

                     वंदना सिंह
      (कापी राईट सुरक्षित )

Monday, April 18, 2016

लड़की

लड़की होना क्या गुनाह है ?
पर लगता है कि ये सच है
उसके जन्म पर अक्सर
मातम मनाया जाता है
पहननें को भाई के कपडे
खानें को जूठा दिया जाता है
पर किस्मत देखो वो
मरती नहीं,जिन्दा रहती है
और धीरे धीरे जब वो
बड़ी हो जाती है,संयोग
से थोड़ा बहुत पढ़ भी
जाती है,अब तो जिंदगी
और भी नरक है,
उसके ब्याह की
उमर हो गई है,पर
कहीं बात न बननें पर
तानों से गल गई है
शरीर सूख पर कांटा
हो गया है,ऊपर से
घर के काम नें दीमक
का काम किया है
आज वो तीस को
पार कर गई है
पर लगता है जैसे वो
चालीस की हो गई है
भाई ने जब कह दिया
शादी की उमर नही रही
उसी पल उसने जीने की
आस छोड़ दी
रोज रोज की चिकचिक
से तंग आ गई वो
खानें के साथ सल्फाज
खा गई वो
चिठ्ठी में सबाल पूछा है
लड़की होना क्या गुनाह है ?

          वंदना सिंह।             
(कापी राईट सुरक्षित )

माँ

तुम को क्या उपहार दूँ
फूलों के गुलाब दूँ
या सोनें का हार दूँ
जो तू मुस्का दे माँ
जीवन अपना वार दूँ

         वंदना सिंह
   ( कापी राईट सुरक्षित )

Saturday, April 16, 2016

मुझे अब तक याद है

     मुझे अब तक याद है

तेरा वो शरमाना
पलकों को उठाना
फिर उनको गिराना
मुझे अब तक याद है
तेरा छत पर आना
बालों का सुखाना
धीरे से मुस्काना
मुझे अब तक याद है
शाम का ढलना
गली से गुजरना
खत को गिराना
मुझे अब तक याद है
बारात का आना
बिदाई का होना
उस में तेरा रोना
मुझे अब तक याद है

        वंदना सिंह
   (कापी राईट सुरक्षित )

Friday, April 15, 2016

पसंद

          पसंद

 टंडन जी के घर जोर शोर से तैयारी चल रही थी। साफ सफाई हो रही है,किचन से अच्छी खुशबू आ रही है।सब खुश नजर आ रहे थे, भला क्यूं न हों उनकी बेटी नीलू को लडके वाले देखनें जो आ रहे हैं। नीलू एक खूबसूरत पढी लिखीMNC     में इंजीनियर है, कहें तो सर्वगुण सम्पन्न, संस्कारी,मृदुभाषी साथ ही स्पष्ट वादी भी ।
दोपहर १२बजे लडकेवाले आते हैं। लडका,लडके के पिता, माँ,बहन, मामा, चाचा करीब १२ लोग, सभी को आदर सहित टंडन जी बैठाते हैं घर के सदस्य आवभगत में लग जाते हैं । लडका भी पीडब्लू डी में इंजीनियर है, लडके की माँ नीलू की माँ से कहती हैं, बहन जी लडकी को बुला लीजिए ,हाँ अभी लाती हूँ और वो अंदर जाती हैं, नीलू एक हल्के नीले रंग की साडी पहने बैठी है, नीलू पहले से ही सुंदर है आज साड़ी में और सुंदर दिख रही है,मां उसे देख मुस्कराती हैं, चल बेटा वो लोग वुला रहे हैं। नीलू- मम्मी आप चलो मैं रानू के साथ आती हूं( रानू नीलू की छोटी बहन है ) पाँच मिनट के बाद नीलू रानू के साथ ड्राइंगरूम में पहुँचती है, सभी नीलू को देखते रह जाते हैं , नीलू वास्तव में फोटो से ज्यादा सुंदर है। लडके की माँ एकदम से नीलू का हाथ पकड के अपने पास बैठाती हैं, और फौरन कहती हैं भाई मुझे तो नीलू बहुत पसंद है उनके घर के सदस्य भी हां में हां मिलाते है। लडके के चाचा लडके से पूछते हैं, क्यों सुमित तुम बताओ ? सुमित थोडा अकड कर बैठता है फिर कहता है मै नीलू से कुछ पूंछना चाहूंगा ? तभी टंडन जी नीलू के पास आते है और धीरे से पूछते है, बेटा तुम्हें लडका कैसा लगा ? ये बात लडके की मां सुन लेती है, अरे भाई साहब लडकी से भी ये कोई पूछता है ? और हंसनें लगती हैं। हाँ क्यूँ नहीं मम्मी , नीलू को अपनी पसंद जाहिर करनें का उतना ही हक है जितना कि मुझे, नीलू तुम मुझे बहुत पसंद हो, पर क्या मैं तुम्हें पसंद हूँ ? सुमित के इतना पूछनें पर नीलू ने सर उठा कर सुमित को देखा और मुस्करा दी ।

                                         वंदना सिंह
                ( कापी राईट सुरक्षित )

आतंक